आदिवासी किशोरी का शव बाप और भाई कांधों पर उठाने मजबूर
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बहादुर पुलिस और अस्पताल प्रबंधन पर फिर खड़े हुए सवाल
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अशोक नगर । जिले के बहादुर से सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़ा उस वक्त हुआ जब अपनी ही बेटी का सब पिता ओर मृतक के परिजन कांधो पर ले जाते हुए बहादुरपुर कस्बे की सड़क पर नजर आए ।
जानकारी के अनुसार विगत 3 मई की सुबह खेरोदा चक निवाशी 15 वर्षीय आदिवासी किशोरी की संदिग्ध मौत पर पुलिस थाना बहादुर पुर द्वारा मृत किशोरी का पोस्ट मार्टम कराया था शव को मृतक के परिजन खैरोना चक ले जाने करीब दो तीन घंटे परेशान रहे उन्हें उनकी बेटी का शव ले जाने कोई भी वाहन का प्रबंध नहीं हुआ काफी हार थक कर मृतक बेटी का शव पिता और उसके लड़के में कांधो पर उठाए हुए अस्पताल परिसर से निकल पड़े सड़क पर शव ले जाते आदिवासी परिवार को ग्रामीणों ने देखा जिससे लोगो में नाराजगी भड़क गई पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर ग्रामीणों ने तीखे सवाल किए हैं इस बीच बहादुर निवाशी समाज सेवक द्वारा उनके निजी वाहन से मृतक किशोरी का शव उनके गांव पहुंचाया ।
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भरी दोपहरी किशोरी का शव धूप में पड़ा रहा
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बहादुर पुर प्रशासन की व्यवस्थाएं उस वक्त शर्मसार हो गई जब मृतक आदिवासी किशोरी का शव दोपहरी में खुले मैदान में पड़ा हुआ था पोस्ट मार्टम के बाद शव को परिजनों को देने के पहिले प्लास्टिक पन्नी में पैक किया जाता हैं लेकिन इस मामले में किशोरी का शव बगैर पेकिंग के ही पुराने कपड़ों में लपेट कर परिजनों को दिया था इस मौके पर पी एस सी प्रभारी डॉक्टर यशवंत तोमर ने बताया कि पोस्ट मार्टम के बाद मृतक के शव को उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस की है हमारे सेंटर पर शव लाने ले जाने के लिए वाहन नहीं है।


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